ओशो निओ-संन्यास क्या है ? What is OSHO Neo-Sannyas?

Lokraj Bhandari
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ओशो निओ-संन्यास (Neo-Sannyas)
, ओशो द्वारा प्रस्तावित एक नई और आधुनिक संन्यास धारा है। यह परंपरागत भारतीय संन्यास से अलग है और इसे आधुनिक जीवनशैली के अनुरूप बनाया गया है। इसका उद्देश्य एक ऐसा जीवन जीना है, जो आत्मज्ञान, प्रेम, और आनंद से भरपूर हो, लेकिन जीवन के सभी भौतिक और सांसारिक पहलुओं को त्यागे बिना।

ओशो निओ-संन्यास की परिभाषा

ओशो निओ-संन्यास एक ऐसा तरीका है, जिसमें व्यक्ति जीवन को पूरी तरह जीते हुए अपने भीतर आध्यात्मिकता और ध्यान को विकसित करता है। इसमें सांसारिक जीवन और आध्यात्मिक खोज में कोई टकराव नहीं है। ओशो का मानना था कि सच्चा संन्यास किसी वस्त्र, मंदिर, या परंपरा से जुड़ा नहीं है, बल्कि यह एक आंतरिक यात्रा है।



ओशो निओ-संन्यास की मुख्य विशेषताएँ

  1. भोग और त्याग के बीच संतुलन

    • यह न तो भोग का विरोध करता है और न ही त्याग की चरम स्थिति की मांग करता है।
    • व्यक्ति भौतिक दुनिया में रहते हुए ध्यान, प्रेम, और आंतरिक शांति प्राप्त कर सकता है।
  2. कोई धार्मिक बंधन नहीं

    • निओ-संन्यास किसी धर्म, जाति, या परंपरा से बंधा हुआ नहीं है।
    • यह व्यक्तिगत स्वतंत्रता और आत्म-जागरूकता पर जोर देता है।
  3. ध्यान और साक्षी भाव

    • ध्यान इसका मूल तत्व है।
    • साक्षी भाव (Observer State) विकसित करना निओ-संन्यास का मुख्य लक्ष्य है।
  4. जीवन को उत्सव बनाना

    • निओ-संन्यास में जीवन को एक बोझ की तरह नहीं, बल्कि एक उत्सव के रूप में देखा जाता है।
    • संगीत, नृत्य, हास्य, और प्रेम को इसमें अहम स्थान दिया गया है।
  5. संन्यासी नाम और पहचान

    • निओ-संन्यास ग्रहण करने वाले व्यक्ति को एक नया नाम दिया जाता है, जो उनकी नई आध्यात्मिक पहचान का प्रतीक है।
    • "स्वामी" और "मां" जैसे शब्दों के साथ यह नाम शुरू होता है।
  6. आंतरिक परिवर्तन पर ध्यान

    • बाहरी वस्त्र या दिखावे से ज्यादा, निओ-संन्यास आंतरिक बदलाव और व्यक्तिगत विकास पर केंद्रित है।


ओशो निओ-संन्यास का उद्देश्य

ओशो निओ-संन्यास का मुख्य उद्देश्य एक ऐसा समाज बनाना है, जहां लोग स्वतंत्र, जागरूक, और प्रेमपूर्ण हो सकें। यह लोगों को उनकी वास्तविक प्रकृति (True Self) को पहचानने और उन्हें बाहरी बाधाओं से मुक्त होने में मदद करता है।


ओशो निओ-संन्यास में जीवन के 3 प्रमुख आयाम

  1. ध्यान (Meditation):
    • जीवन में स्थिरता और जागरूकता लाने के लिए।
  2. प्रेम (Love):
    • दूसरों के साथ गहरे जुड़ाव और करुणा का विकास।
  3. जश्न (Celebration):
    • हर पल को आनंद और उत्साह के साथ जीने की कला।

ओशो निओ-संन्यास के बारे में ओशो के शब्द

ओशो कहते थे:

"संन्यास का मतलब है पूरी तरह से जागरूक होकर जीना। यह जीवन का इनकार नहीं है, बल्कि जीवन का सबसे गहरा स्वीकार है।"


ओशो निओ-संन्यास एक व्यक्तिगत और आंतरिक यात्रा है, जो व्यक्ति को स्वतंत्रता, प्रेम, और आनंद के उच्चतम स्तर तक ले जाती है। यदि आप इस विचारधारा को अपनाने या इसे और गहराई से समझने में रुचि रखते हैं, तो ओशो के साहित्य और ध्यान तकनीकों को जरूर पढ़ें और आज़माएं। 🙏

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