OSHO के विज्ञान भैरव तंत्र Full Audio Book

Lokraj Bhandari
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कल्पना कीजिए, एक शांत सुबह है। आप अपने भीतर झाँकना चाहते हैं। कोई मंदिर, कोई मस्जिद, कोई चर्च नहीं — बस खुद के भीतर उतरना चाहते हैं। यही यात्रा है विज्ञान भैरव तंत्र की।

ओशो इस किताब में हमें एक गहरे, सरल और जीवित ध्यान की कला सिखाते हैं — एक ऐसा ध्यान, जिसमें न कोई पूजा है, न मंत्र, न कोई धार्मिक बंधन। बस आप हैं, आपकी साँस है, और अभी का यह क्षण।

Full Audio Book....


🌸 ये किताब है क्या?

यह कोई "सिर्फ पढ़ने" वाली किताब नहीं है।
यह एक जीवन को जीने की किताब है।
यह एक दरवाज़ा है — भीतर की ओर खुलने वाला।

इस किताब में भगवान शिव ने देवी पार्वती को 112 तरीके बताए हैं — ध्यान करने के, अपने भीतर जागने के। और ओशो ने इन तरीकों को आधुनिक भाषा में, हमारे जैसे आम इंसानों के लिए समझाया है।


🧘‍♀️ जैसे-जैसे ओशो बोलते हैं...

आप महसूस करते हैं कि ध्यान कोई कठिन चीज़ नहीं, कोई हिमालय की चोटी पर साधु बनने का काम नहीं...
बल्कि ध्यान वही है जो आप हर रोज़ करते हैं, बस होश के बिना करते हैं।

  • जब आप गहरी साँस लेते हैं – वही ध्यान है।

  • जब आप किसी सुंदर चीज़ को देखते हैं और कुछ पल को खो जाते हैं – वही ध्यान है।

  • जब आप किसी को पूरे दिल से सुनते हैं – वही ध्यान है।

ओशो आपको सिखाते हैं कि आपको बदलने की जरूरत नहीं, आपको केवल सचेत होने की जरूरत है


🪔 वॉल्यूम 1 में क्या-क्या मिलेगा?

इस पहले खंड में ओशो हमें बताते हैं:

  • ध्यान क्या है?

  • तंत्र क्या है?

  • क्यों 112 तरीके हैं? क्या एक तरीका काफी नहीं?

  • और फिर वो शुरुआत करते हैं — एक-एक ध्यान सूत्र को खोलकर, ऐसे जैसे कोई फूल खिल रहा हो।

कुछ ध्यान विधियाँ जो ओशो ने इसमें समझाई हैं:

  • “जब साँस भीतर जाए या बाहर निकले — बीच के अंतराल को देखो।”

  • “किसी भी सुंदर चीज़ को देखो और वहीं रुक जाओ — खो जाओ उसमें।”

  • “आँखें बंद करो, सुनो — सिर्फ ध्वनि को सुनो — बिना किसी शब्द के अर्थ में जाए।”

हर एक तकनीक आपको एक नई खिड़की खोलने में मदद करती है — अपने भीतर की ओर।


🌿 किसके लिए है यह किताब?

  • अगर आप भीतर की शांति ढूंढ रहे हैं...

  • अगर आप सोच से थक चुके हैं...

  • अगर आपको लगता है कि धर्म, पूजा, कर्मकांडों से परे कुछ और होना चाहिए...

  • अगर आप सिर्फ जीना चाहते हैं — पूरे होश से...

तो यह किताब आपके लिए है।


🌟 अंत में

ओशो इस किताब में कोई ज्ञान नहीं देते, कोई आदेश नहीं देते —
वे सिर्फ एक आईना रखते हैं... और कहते हैं:

“देखो — तुम्हारे भीतर एक दरवाज़ा है। चलो, साथ में उस ओर चलते हैं।”


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