कल्पना कीजिए, एक शांत सुबह है। आप अपने भीतर झाँकना चाहते हैं। कोई मंदिर, कोई मस्जिद, कोई चर्च नहीं — बस खुद के भीतर उतरना चाहते हैं। यही यात्रा है विज्ञान भैरव तंत्र की।
ओशो इस किताब में हमें एक गहरे, सरल और जीवित ध्यान की कला सिखाते हैं — एक ऐसा ध्यान, जिसमें न कोई पूजा है, न मंत्र, न कोई धार्मिक बंधन। बस आप हैं, आपकी साँस है, और अभी का यह क्षण।
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🌸 ये किताब है क्या?
इस किताब में भगवान शिव ने देवी पार्वती को 112 तरीके बताए हैं — ध्यान करने के, अपने भीतर जागने के। और ओशो ने इन तरीकों को आधुनिक भाषा में, हमारे जैसे आम इंसानों के लिए समझाया है।
🧘♀️ जैसे-जैसे ओशो बोलते हैं...
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जब आप गहरी साँस लेते हैं – वही ध्यान है।
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जब आप किसी सुंदर चीज़ को देखते हैं और कुछ पल को खो जाते हैं – वही ध्यान है।
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जब आप किसी को पूरे दिल से सुनते हैं – वही ध्यान है।
ओशो आपको सिखाते हैं कि आपको बदलने की जरूरत नहीं, आपको केवल सचेत होने की जरूरत है।
🪔 वॉल्यूम 1 में क्या-क्या मिलेगा?
इस पहले खंड में ओशो हमें बताते हैं:
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ध्यान क्या है?
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तंत्र क्या है?
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क्यों 112 तरीके हैं? क्या एक तरीका काफी नहीं?
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और फिर वो शुरुआत करते हैं — एक-एक ध्यान सूत्र को खोलकर, ऐसे जैसे कोई फूल खिल रहा हो।
कुछ ध्यान विधियाँ जो ओशो ने इसमें समझाई हैं:
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“जब साँस भीतर जाए या बाहर निकले — बीच के अंतराल को देखो।”
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“किसी भी सुंदर चीज़ को देखो और वहीं रुक जाओ — खो जाओ उसमें।”
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“आँखें बंद करो, सुनो — सिर्फ ध्वनि को सुनो — बिना किसी शब्द के अर्थ में जाए।”
हर एक तकनीक आपको एक नई खिड़की खोलने में मदद करती है — अपने भीतर की ओर।
🌿 किसके लिए है यह किताब?
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अगर आप भीतर की शांति ढूंढ रहे हैं...
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अगर आप सोच से थक चुके हैं...
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अगर आपको लगता है कि धर्म, पूजा, कर्मकांडों से परे कुछ और होना चाहिए...
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अगर आप सिर्फ जीना चाहते हैं — पूरे होश से...
तो यह किताब आपके लिए है।
🌟 अंत में
“देखो — तुम्हारे भीतर एक दरवाज़ा है। चलो, साथ में उस ओर चलते हैं।”

